

2025-06-06 20:20:00
जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में पद संभाला, तब व्यवस्थित कौशल विकास और प्रशिक्षण के अवसरों की कमी से जूझती एक बढ़ती युवा आबादी भारत की एक मुख्य समस्या बनी हुई थी। प्रशिक्षण केंद्र बहुत कम और बिखरे हुए थे, उद्योगों से संबंध मजबूत नहीं थे, और ग्रामीण तथा पिछड़े वर्ग के युवा इससे काफी दूर थे।
इस परिस्थिति की गंभीरता और विशाल संभावनाओं को समझते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कौशल विकास को राष्ट्रीय विकास का एक प्रमुख स्तंभ माना। उनके नेतृत्व में 2015 में स्किल इंडिया मिशन की शुरुआत की गई, जिससे भारत एक ऐसे कार्यबल के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा जो आत्मविश्वासी, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार हो।
पिछले 11 वर्षों में, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पूरे देश में कौशल विकास की प्रणाली को पूरी तरह बदल दिया है। यह बदलाव खास योजनाओं, बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण के इकोसिस्टम और समावेशिता(सीखने-सिखाने की सुविधाएं या सीखने के लिए तैयार की गई जगहें (जैसे ट्रेनिंग सेंटर, संस्थान आदि) पर विशेष ध्यान के जरिए किया गया है। आज भारत का वर्कफोर्स वैश्विक अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुरूप तैयार खड़ा है।
रोजगार के लिए कुशलता: आत्मनिर्भर युवाओं की नींव
इस मिशन का उद्देश्य देश के युवाओं को उभरते हुए रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुसार कुशल बनाना है। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की देख-रेख में चल रही प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत अब तक 2.27 करोड़ से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इन योजनाओं के अंतर्गत लोगों को औपचारिक प्रमाण पत्र, व्यावहारिक प्रशिक्षण और उद्योग की ज़रूरतों के अनुसार अनुभव मिला है। इस मिशन का मुख्य परिणाम रहा है युवाओं की रोज़गार पाने की क्षमता में सुधार लाना। सरकार के कौशल आधारित दृष्टिकोण का असर यह हुआ कि अंतिम वर्ष के छात्रों में रोज़गार योग्य बनने की दर 2014 में 33.9% से बढ़कर 2024 में 51.3% हो गई।
रोज़गार के लिए कौशल: पीएमकेवीवाई और आईटीआई
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) भारत की कौशल विकास व्यवस्था का मुख्य आधार है। 2015 में शुरू हुई इस योजना के अंतर्गत अब तक 1.6 करोड़ से ज़्यादा युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस योजना में कम समय के प्रशिक्षण (शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग - STT) के माध्यम से युवाओं को नौकरी के लिए तैयार किया जाता है। पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS 2022-23) के अनुसार, अब ज़्यादातर व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त लोग लाभकारी रोज़गार में लगे हैं।
PMKVY के साथ मिलकर देशभर में संचालित हो रहे 15,000 से अधिक इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स (आईटीआई) भी युवाओं को कौशलयुक्त बना रहे हैं। आईटीआई में ट्रेड-विशेष पाठ्यक्रम दिए जाते हैं, जो युवाओं को उद्योगों की ज़रूरत के अनुसार कौशल प्रदान करते हैं। पीएम मोदी सरकार ने इन आईटीआई को आधुनिक बनाया है, ड्यूल ट्रेनिंग मॉडल शुरू किए हैं, और उन्हें आधुनिक उद्योगों से जोड़ा है, ताकि भारत का “टेक्निकल वर्कफोर्स” भविष्य के लिए पूरी तरह तैयार हो सके।
गांवों तक पहुंच: डी.डी.यू-जी.के.वाई(DDU-GKY) और पीएमजीदिशा(PMGDISHA)
समान विकास के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रामीण कौशल विकास को विशेष प्राथमिकता दी है। दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) विशेष रूप से 15 से 35 वर्ष की आयु के ग्रामीण गरीब युवाओं को लक्षित करती है। इसका उद्देश्य उन्हें स्थायी रोज़गार के अवसर और कौशल विकास के माध्यम से सशक्त बनाना है। 2014 से अब तक 17 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से अधिकांश लाभकारी रोज़गार में लगे हुए हैं।
ग्रामीण भारत में डिजिटल पहुंच सुनिश्चित करने और डिजिटल जीवनयापन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की नीति का प्रमुख फोकस रहा है। इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए 2017 में प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA) शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य देश भर के 6 करोड़ ग्रामीण घरों तक डिजिटल साक्षरता पहुंचाना था। इस योजना के अंतर्गत अब तक 6.39 करोड़ ग्रामीण नागरिकों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 4.78 करोड़ को डिजिटल रूप से साक्षर प्रमाणित किया गया है। इस योजना ने ग्रामीण युवाओं को ई-गवर्नेंस, वित्तीय सेवाओं और दूरस्थ रोज़गार के अवसरों तक पहुंचने में सक्षम बनाया है।
हाशिये पर खड़े लोगों को सशक्त बनाता पीएम-दक्ष योजना
"सबका साथ, सबका विकास" के अपने विजन के अनुरूप, मोदी सरकार ने वंचित समुदायों के लिए लक्षित कौशल विकास योजनाएं शुरू की हैं। वर्ष 2020-21 में शुरू की गई प्रधानमंत्री दक्षता और कौशल सम्पन्न हितग्राही (PM-DAKSH) योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, विमुक्त जाति (Denotified Tribes), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और सफाई मित्रों की क्षमता को बेहतर बनाना है।
उपलब्ध ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, अब तक 112 सूचीबद्ध संस्थानों के माध्यम से 80,185 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिस पर 366 करोड़ से अधिक का बजटीय सहयोग दिया गया है। यह योजना रोजगार और स्वरोजगार के अवसर देकर वंचित वर्गों के लोगों को सामाजिक और आर्थिक रूप से ऊपर उठाने में मदद कर रही है और उन्हें सुरक्षा और सम्मान दिला रही है।
प्रधानमंत्री मोदी सरकार ने देश के युवाओं में नवाचार और उद्यमिता की सोच विकसित करने के लिए अटल इनोवेशन मिशन शुरू किया और स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब्स (ATLs) की स्थापना की। वर्ष 2016 से अब तक 10,000 ATLs स्थापित की जा चुकी हैं, जिनके माध्यम से 1.1 करोड़ से अधिक छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी नई तकनीकों से परिचित कराया गया है।
AIM ने शिक्षकों और प्रशिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया है, ताकि वे छात्रों में समस्याओं के समाधान की सोच और आलोचनात्मक सोच विकसित कर सकें। अगले 5 वर्षों में ATLs की संख्या बढ़ाकर 50,000 करने का लक्ष्य है, जिससे भारत की नई पीढ़ी को वास्तविक जीवन की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया जा सके और नवाचार की संस्कृति को और मजबूती दी जा सके।
कौशल को आकांक्षाओं और परिणामों से जोड़ना
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने देश में कौशल विकास को लेकर सोच को पूरी तरह बदल दिया है। अब इसे व्यक्तिगत और पेशेवर सफलता की नींव के रूप में देखा जाता है। सरकार ने स्किल डिलीवरी के तरीके में कई बदलाव किए हैं, जिनमें शामिल हैं: सेक्टर स्किल काउंसिल्स के साथ मिलकर तैयार किए गए उद्योग से जुड़े प्रशिक्षण मॉड्यूल, कौशल विकास को औपचारिक शिक्षा और उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ जोड़ना, और परिणामों और प्लेसमेंट की निगरानी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और ट्रैकिंग का उपयोग करना।
विकसित भारत की ओर अग्रसर
पीएम मोदी के विजन ने पिछले 11 वर्षों में कौशल विकास को अत्यधिक प्राथमिकता दी है। सरकार विभिन्न लक्षित योजनाओं, डिजिटल साक्षरता अभियान, और नवाचार केंद्रों के माध्यम से एक कुशल, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार भारतीय वर्कफोर्स बना रही है। सरकार आने वाले वर्षों में 4.1 करोड़ से अधिक लोगों को प्रशिक्षण देने के लिए 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने वाली है।
हर एक कुशल युवा आत्मनिर्भर भारत की ओर एक कदम है। देश की यह कौशल पहल न केवल रोजगार सृजित कर रही है, बल्कि आजीविका को भी सशक्त बना रही है और विकसित भारत के लिए मजबूत नींव रख रही है।

Empowering India's Amrit Peedhi
June 6 , 2025
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का मुख्य फोकस रोजगार सृजन पर रहा है। पिछले 11 वर्षों में, भारत ने अनौपचारिक रोजगार सृजन से हटकर एक व्यवस्थित इकोसिस्टम की ओर कदम बढ़ाया है, जो भागीदारी, विस्तार, और इनोवेशन पर फोकस कर एंटरप्रेन्योरशिप, कौशल विकास, और वर्कफोर्स के नियमन को प्रोत्साहित करता है। मोदी सरकार ने रोजगार को व्यक्तियों के सम्मान व सशक्तिकरण तथा राष्ट्रीय विकास को तेजी से बढ़ाने के माध्यम के रूप में नए सिरे से परिभाषित किया है। शहरों, कस्बों और गांवों हर जगह देश में एक कर्मचा

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June 6 , 2025
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में भारत की खेल पहचान में जबरदस्त वृद्धि हुई है। देश में खेल के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आया है, जो संस्थागत सुधारों, जमीनी स्तर पर विकास और समावेशी भागीदारी से प्रेरित है। यह परिवर्तन प्रतिबद्धता, इन्फ्रास्ट्रक्चर और राष्ट्रीय गौरव से जुड़ा हुआ है – और देश ने खेलों के क्षेत्र में एक शांत परंतु शक्तिशाली क्रांति को देखा है। यह क्रांति नीतिगत स्तर और खिलाड़ियों के प्रदर्शन – दोनों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह बदलाव एक सोची-समझी